सरल और सहज होना सबसे बड़ी शिक्षा

- रामकुमार सेवक 

         सत्संग में आने वालों की संख्या निरंतर कम हो रही थी जबकि भारत में धर्म ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी पूछा कभी कम नहीं होती |प्रबंधको के लिए यह लगातार चिंता का कारण बना हुआ था कि लोग अब कहाँ जा रहे हैं| 

       ज्ञात हुआ कि नदी के उस तरफ तीन सन्त निवास करते हैं ,लोग उनके सत्संग में जाने लगे हैं| स्थापित धर्मपुस्तक |

       बाइबिल के इन वक्ताओं ने इन सन्तों के निकट जाने का निष्कर्ष निकाला |

यह निष्कर्ष कुछ गलत भी नहीं था |

       अपनी दुकान पर अगर ग्राहकों की संख्या घटनी शुरू हो जाये तो किसी भी दुकानदार को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए इसलिए निष्कर्ष कुछ गलत भी नहीं था |

        वे जैसे ही गाँव में घुसे ,उन्होंने उस गाँव के तीन सन्तों के बारे में पूछा |

         सन्तजनों के बारे में अक्सर लोगों की रूचि नहीं होती क्यूंकि लोग अक्सर भोजन में रूचि लेते हैं ,इसके अलावा धन संग्रह में भी लोगों की खूब रूचि है और वह जरूरी भी है चूंकि संसार में संबंधों का आधार धन ही है लेकिन धन से कभी कोई पूर्णतः संतुष्ट नहीं हुआ जबकि कबीर दास जी कहते हैं-

           गोधन ,गजधन,बाजधन और रतन धन खान 

            जब आये संतोषधन सब धन धूरि समान   |

हाथियों का धन ,बाजधन अर्थात घोड़ों का धन ,इन तीन पशुओं के धन के बाद चौथे स्थान पर कबीर दास जी ने रत्नो की खान को रखा है |

         इन चार के बाद कबीर दास जी ने लिखा है कि-

जब आये संतोष धन सब धन धूरि समान 

अर्थात रत्नो की खान भी संतोष के सामने फीकी है |

      बाइबिल के वे उदभट विद्वान् समझ नहीं पा रहे थे कि तीनो सन्तों में ऐसी कौन सी विशेषता है जो हमारी विद्वता पर भारी पड़ रही है |

       मज़े की बात यह थी कि इन तीन सन्तों को ,अपने बारे में खुद भी पता नहीं था |

       उन्होंने गांव के लोगों से तीन सन्तजनों के बारे में पूछा लेकिन इन तीन सन्तों का न कोई आश्रम था और न ही कोई मठ आदि था |इस प्रकार कोई भी स्पष्ट कुछ बता न पाता था | 

        बाइबिल के ये विद्वान् उन सन्तजनों के बारे में खोज कर ही रहे थे कि कोई व्यक्ति उन्हें इन तीन सज्जनो के पास ही ले आया |

         तीनो ने कहा-महोदय ,हम तो साधारण इंसान हैं |सन्तजन तो किसी मठ या आश्रम में रहते होंगे |

इन शब्दों में उन्होंने किन्हीं सन्तजनों के परिचय से अपनी अनभिज्ञता स्पष्ट कर दी |

        बाइबिल के ये विद्वान् सोचने लगे कि आखिर इन सन्तों को कहाँ खोजें ?

        हमारे लोगों में जिन्होंने सेंध लगा दी |जो हमारे सैकड़ों श्रद्धालुओं को प्रभावित कर सकते हैं ,कोई साधारण सन्त हो नहीं सकते इसलिए वे कई समूहों में विभाजित हो गए |

        उन्होंने काफी लोगों से तीन श्रद्धालुओं -सन्तों के बारे में जानकारी हासिल की लेकिन अंततः इन तीन लोगों तक ही पहुंचे 

          लेकिन ये लोग बाइबिल की जो साधारण प्रार्थनाएं भी तरीके से बोल नहीं पाते थे तो इन उद्भट विद्वानों के चर्च में ये कोई चमत्कार कर देंगे ,ऐसा किसी को विश्वास न होता था |लेकिन कई तरीकों से खोज करके भी किसी अन्य निष्कर्ष तक ये परम विद्वान् पहुँच न सके |

       बाइबिल की जो प्रार्थनाएं ये जानते थे उन्होंने उन्हीं को दोहराना शुरू कर दिया ये तीनो बोडम उनकी बातों को सत्य मानने लगे |

         ये तीनो व्यक्ति बहुत ही सरल थे |बाइबिल के विद्वानों ने जैसा समझाया उन्होंने मान लिया | इससे उनको कुछ भी आपत्ति नहीं थी क्योंकि वे अत्यंत सरल थे |

                  मन चंगा तो कठोती में गंगा के वे जीवंत स्वरूप थे |

उनका कोई आश्रम या संस्था नहीं थी इसलिए वे किसी बंधन में नहीं थे |उनके मुखमण्डल पर अनोखी शांति थी ,जिसे देखकर ये बाइबिल के विद्वान् बेचैन हो जाते थे |

           इन तीनो सरल लोगों के मुख पे जो शांति विद्यमान थी उसे देखकर ये विद्वान् बेचैन हो उठते थे |

इन तीनो में से एक को ध्यान आया कि विद्वानों ने उन्हें जो प्रार्थनाएं सिखाई थीं वह उन्हें भूल गया है |

सही प्रार्थनाएं सीखने के लिए वह उनके जलपोत की तरफ दौड़ा |

          विद्वान् यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि वह पानी पर ऐसे दौड़ रहा था जैसे वह पानी न होकर एक समतल ज़मीन हो |अब वे समझे कि ये तीनो लोग ,जिन्हें वे बोडम समझते थे ,परम सिद्ध पुरुष हैं | 

         इन विद्वानों में से एक बोला-आप जो प्रार्थनाएं बोलते हो,उन्हीं को बोलते रहो,वही मुक्ति के लिए पर्याप्त हैं |