सोमवार को महात्मा एक घटना का जिक्र कर रहे थे |
श्री दलबीर सिंह जी अपने विचार प्रकट करते हुए कह रहे थे कि निरंकारी कॉलोनी में एक महात्मा आये |
शायद बिहार से आये थे |उनकी गोद में एक छोटा बालक था |
मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि-बच्चे के पैरों में बहुत सूजन है ,यहाँ तक कि डॉक्टर ने घुटनो के नीचे से पैर काट डालने के लिए कहा है |
दलबीर सिंह जी ने उस सज्जन से कहा कि कल शनिवार है |कल कोठी में बाबा हरदेव सिंह जी को नमस्कार करने का अवसर मिलेगा |
आप कल बाबा जी के चरणों में हाजिर हो जाना |मालिक कृपा करेगा ,बच्चे की टांग काटने की नौबत नहीं आएगी |सही समय पर महात्मा कोठी में हाजिर हो गए |दर्शनार्थी महापुरुषों की लम्बी लम्बी लाइनें
लगी थीं |सब गुरु की कृपा दृष्टि चाहते थे | बिहार वाले महापुरुष भी बच्चे को गोद में सच्चे बादशाह सत्गुरु की एक कृपा दृष्टि चाहते थे |एक लाइन में लगे थे |धीरे -धीरे लाइन आगे बढ़ी और वे सत्गुरु के सामने पहुँच गए |दलबीर सिंह जी ने महापुरुषों को पहले ही कह दिया था कि टांग काटने की बात बाबा जी से नहीं कहनी बल्कि बाबा जी से रहमत की मांग करनी है |बाबा जी ने अपने पाजामे को थोड़ा ऊपर किया और महापुरुषों से पूछा कि डॉक्टर ने कहाँ से टांग काटने की बात कही है ?इस प्रकार बाबा जी ने बच्चे की वस्तुस्थिति समझ ली |
आगे दिन बिहार वाले महात्मा डिस्पेंसरी में पहुँचे |बाबा जी ने बच्चे को आशीर्वाद दे ही दिया था इसलिए बिहार वाले महात्मा बच्चे को साथ लेकर डिस्पेंसरी की एम्बुलेंस में सवार हो गये | लेकिन गुरु की कृपा जब बरसती है तो शोर नहीं करती लेकिन गुरसिख के जीवन में क्रांति घटित हो जाती है |
रात ही रात में बच्चे की टांग की सूजन कम होनी शुरू हो गयी थी और कम होने की प्रक्रिया लगातार जारी थी |उस दिन वे बिहार से आये महात्मा जब डॉक्टर के पास पहुँचे तो डॉक्टर खुश हो गया |उसने कहा -अब बच्चे की टांग काटने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी |आप इस सूजन पर दवाई लगाते रहो |अब सूजन लगातार कम हो रहा है इसलिए धीरे धीरे सूजन बिलकुल ख़त्म हो जाएगा |
अगली बार आपको शायद काफी आराम हो जाए कि बच्चे को दिल्ली लाने की ज़रुरत ही न पड़े |यह है क़ामिल मुरशद की दृष्टि का प्रभाव |
