भक्ति की दिव्य शक्ति

 रामकुमार सेवक 

भक्ति की शक्ति का आकलन निराकार रूप में होता है |साकार रूप में तो कुछ होता हुआ दिखाई नहीं देता उसके नतीजे हमें विवश कर देते है कि कुछ तो है जो चमत्कार करने की क्षमता रखता है |यह किसी व्यक्ति का चमत्कार नहीं है बल्कि सत्य और ईमानदारी का चमत्कार है जिसे हम घटित हुआ देखते हैं |

आज दिल्ली की निरंकारी कॉलोनी में हुए सत्संग में मैंने सुना -तन स्वस्थ रहे,मन मस्त रहे,धन ज़बरदस्त रहे|आगे कहा गया कि सेवा ,सुमिरन ,सत्संग में जीवन व्यस्त रहे |

वक्ता सज्जन ने बताया कि यह मांग लैंसडौन (उत्तराखंड )में रह रहे,एक महात्मा ने अपनी संगतों के लिए की |

युवावस्था में विश्वमित्र जी (रोशनआरा रोड दिल्ली ) के चरणों में रहने का मौका मिला है |

एक बार मैं दो दिन संगत में नहीं जा पाया |उन्होंने कारण पूछा तो मैंने कहा -तबियत ठीक नहीं थी |

उन्होंने पूछा-क्या संगत की नागा करने से तबियत ठीक हो गयी ?तो मैंने कहा -जी नहीं |दवाई खायी तो तबियत ठीक हुई |

उन्होंने कहा -अगर संगत में आते तो दवाई खाने की ज़रुरत ही न पड़ती |

मैंने पूछा -अगर दवाई न खाता तो तबियत कैसे ठीक होती ?

महात्मा बोले -संगत में आते तो महापुरुषों की नज़रें पड़तीं और दवाई के बिना भी तबियत ठीक हो जाती |

यह है -भक्ति की शक्ति |

यह एक दिव्य अनुभव था जो महात्मा विश्वमित्र जी ने सहज ही समझा दिया |  

उस समय मेरे पास एक पुरानी फ़िएट कार थी |महात्मा कहते-बच्चे ,संगत में चलना है | उनके वचनो को सत्य वचन करने की जिम्मेदारी मेरी होती |और वह जिम्मेदारी सहज ही पूरी हो जाती |

संगत तब बाबा हरदेव सिंह जी की हुजूरी में निरंकारी कॉलोनी स्थित सन्त निरंकारी सी.सेकण्डरी स्कूल में हुआ करती थी |

महात्मा दुपट्टा पहनकर नीचे उतरते और जैसे ही गाड़ी में बैठते तो कोई एक सज्जन हाथ से इशारा करते कि मुझे भी संगत में जाना है |

विश्वमित्र जी कहते कि -इन्हें बिठा लो |थोड़ा आगे चलकर दो और सज्जन मिलते जो कि संगत में जाना चाह रहे होते |महात्मा विश्वमित्र जी कहते -इन्हें भी बिठा लो |अब पांच सवारी गाडी में बैठी होतीं |

मैं पीछे देखता तो दुपट्टा पहने महात्मा का सिर गाड़ी से छू रहा होता |वे मेरी दृष्टि को जैसे पढ़ लेते थे कहते -बच्चे बड़ी गाड़ी मिल जाएगी |

समय जैसे -जैसे बीता उनके वचन सत्य होते गए |

पीतमपुरा के महात्मा सुन्दर लाल खुराना जी  भी अक्सर अपने ऐसे अनुभव सुनाया करते थे |जिनसे पता चलता था कि महात्माओं के वचनो में कितनी शक्ति होती है |