हास्य-व्यंग्य : ईमानदारी अलाऊ नहीं है यहाँ

सुबह घर से निकला |मुझे पता नहीं था कि मेरा जो निकलने का टाइम है वही बिल्ली जी के भी सैर कार्यक्रम का टाइम है लिहाजा काली बिल्ली तुरंत प्रकट हुई और रास्ते के उस पार ऐसे दौड़ी ,जैसे आवारा कुत्तों का समूह उनका पीछा कर रहा हो |शोले की बसंती की तरह उनकी भी इज्जत का सवाल हो |

मेरा माथा ठनका कि  इस काली बिल्ली को भी अभी प्रकट होना था |

किसान सडकों पर धरना दिए बैठे हैं लेकिन सरकार अपने स्टैंड पर यूँ जमी हुई है जैसे सर्दी में बर्फ | ठण्ड के इस समय में ऐसा होना बिलकुल अनुकूल है लेकिन किसानो का धरना मौसम के अनुकूल नहीं है |कितने ही किसान वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं लेकिन मंत्री महोदय मानते हैं कि यह वीरगति नहीं है |

चंदूलाल जी आजकल मंत्री महोदय के मौसमी चमचे हैं उन्होंने कहा-जो किसान मरे हैं ,उनकी किस्मत में यही लिखा था ,सरकार का क्या कसूर |ये सब एक- एक करके  अधोगति को प्राप्त हो रहे हैं |

मंत्री जी को तुरंत शब्द मिल गया,वे खुश होकर बोले -जो किसान मर रहे हैं,वे सब अधोगति को प्राप्त हो रहे हैं|हम क्या करें ,उनकी किस्मत में यही लिखा है |

मैंने सोचा -बिल्ली कौन सा हमारी भाषा जानती है |उसे क्या पता कि उसने हमारा रास्ता काट दिया है |और आजकल भी धार्मिक लोग इस अपशकुन को बहुत मानते हैं |

मैं बेटे की बाइक पर पीछे बैठकर अपने रास्ते निकल लिया चूंकि जब से मुसद्दी लाल जी मंत्री बने हैं तब से अपशकुन ही तो हो रहे हैं |हरा धनिया ,जो कभी बाकी सब्जियों के साथ मुफ्त में मिला करता  था ,आजकल दस रूपये का पचास ग्राम मिलता है |

बिल्ली बेचारी ने कौन सा जान-बूझकर रास्ता काटा है |उसे हम जैसे मामूली आदमी की क्या परवाह ,वो तो दूध की तरफ देख रही थी जो पप्पू के गिलास से नीचे गिरा था |

मैं आगे बढ़ा ही था कि एक आदमी हाथ जोड़े खड़ा दिखाई दिया |मैं घबराया कि यह क्या चाहता है ?

हाथ जोड़ने वालों का क्या भरोसा कि कब उसी का गला पकड़ लें,जिससे वोट मांगते थे |मंत्री जी भी तो एक साल पहले किसानो के सामने हाथ ही जोड़ रहे थे और अब उनका गला यूँ पकडे हैं जैसे उनके हाथों में फेविकोल लगा हो |

किसान कह रहे हैं कि हमें नए कानून नहीं चाहिए लेकिन मंत्री जी कह रहे हैं -मूर्खता मत करो |इन कानूनों में नीचे से ऊपर तक भलाई ही भलाई भरी पडी है इसलिए हम तुम्हें ये कानून देकर ही रहेंगे |

वह आदमी हाथ जोड़े यूँ खड़ा था जैसे अगला इलेक्शन जीतकर ही रहेगा लेकिन उसकी आँखों में जो भलमनसाहत थी वह मुझसे कह रही थी कि इससे कोई खतरा नहीं |

अरे यह तो हमारा दूध वाला भाई था जो हाथ जोड़े खड़ा था |

मैंने सोचा कि बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ होता ही है इसलिए मैंने मन ही मन हनुमान चालीसा पढ़ा और उससे बोला- कहो हरिया,क्या बात है,मैं जल्दी में हूँ ,जो कहना है जल्दी कहो |

हरिया बोला -कुछ कहना नहीं है,बस ये पांच सौ रूपये आप रख लो |

मैं हैरान होते -होते बचा |मैंने कहा-पांच सौ रूपये किसलिए ?

 कल आपके घर से जो पैसे लिये थे उनमें बीबी जी ने गलती से पांच सौ रूपये ज्यादा दे दिए थे इसलिए लौटा रहा हूँ |

मैंने कहा-हरिया तुम्हें तो हमारे देश की सरकार में मंत्री या सरकारी अफसर होना चाहिए था ,जनता का बहुत भला हो जाता |

म्हारे ऐसे नसीब कहाँ, कहकर उसने दोबारा हाथ जोड़ दिये |

मुझे तो पता नहीं लेकिन पांच सौ रूपये सुबह -सुबह पाकर मेरे चेहरे पर ऐसी चमक आ गयी होगी जैसे पिछले साल से रुका हुआ महंगाई भत्ता एक साथ मेरे खाते में आ गये हों अथवा पड़ोसी की शीशी का सरसों का तेल मेरी शीशी में आ गया हो और मैंने उसे चेहरे पर लगा लिया हो, क्रीम की तरह |

कोई चेहरे पर तेल लगाता है,कहकर मैंने खुद पर लानत भेजी |

मुझे एक बात याद आ गयी कि चोरी का माल मोरी में जाता है |जरूर बेगम साहिबा ने कभी मेरी जेब से पांच सौ का नोट पार किया होगा |यह सोचकर मेरी ख़ुशी दोगुनी हो गयी |ऐसा लगा जैसे किसानो के साथ न्याय हो गया हो | 

जैसे चौबे जी छब्बे जी हो गए हों ,इस भाव से हम महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की तरह बाइक पर सरपट दौड़े जा रहे थे |यूँ खुश जैसे अच्छे दिनों की सरकार में अच्छे दिन आ गए हों | अकाउंट खाली होने के बावजूद ए.टी.एम से असली नोट निकल आये हों |

अभी हम मुंगेरी लाल जी की तरह इन हसीन सपनो का आनंद बिना जी.एस. टी.चुकाए ले ही रहे थे कि ट्रैफिक पुलिस का उड़नदस्ता यूँ प्रकट हुआ जैसे सरकार ने हमारे स्वागत के लिए उसे नियुक्त किया हो |हम कुछ समझते उससे पहले ही उनमें से एक ने अपनी मशीन निकाली और पांच सौ रूपये का चालान काटकर बेटे के हाथ में पकड़ा दिया |हमारी खता क्या थी मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि इस सड़क से जाना अलाऊ है,अंदर आना नहीं |    (साभार-जनवरी  2021)      

- औघड़नाथ