स्मृति : फ़िल्मी परदे की नयी माँ - रीमा लागू

फ़िल्मी परदे की माँ को याद करते हैं,तो सबसे पहला नाम अभिनेत्री नरगिस का आता है जिन्होंने निपट जवानी की उम्र में फिल्म मदर इंडिया में माँ की भूमिका निभाई थी |उस भूमिका में नरगिस ने भारत की माँ की भूमिका का प्रतिनिधित्व किया था |इस फिल्म का अपना गौरवपूर्ण इतिहास है |अभी हम याद कर रहे हैं फ़िल्मी परदे की अपेक्षाकृत नयी माँ-रीमा लागू को | 

रीमा जी का जन्म 1958 में हुआ था। उनका नाम पहले गुरिंदर भड़भड़े था। इनकी माँ मन्दाकिनी भड़भड़े एक अभिनेत्री थीं, जो लेकुर उदण्ड जाहली नामक नाटक के कारण मराठी मंच में जानी जाती थी। रीमा जी के अभिनय की कला का पता पुणे में पता चला जब वे हुजूरपगा उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा थीं। उच्च माध्यमिक विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही उनकी पेशेवर के रूप में अभिनय की शुरुआत हुई।

इनकी अभिनय में उन्हें यात्रा मराठी मंच से शुरू हुई | इसके बाद 1979 में इन्होंने मराठी फिल्म "सिंहासन" से अपने अभिनय के सफर में कदम रखा। इसके एक वर्ष बाद, 1980 में इन्हें "कलयुग" नामक हिन्दी फिल्म में काम मिल गया और इसी से इनकी हिन्दी फिल्मों में भी शुरुआत हुई।

रीमा लागू फिल्मों में अपने मां के किरदार के लिए बेहद मशहूर थी। 90 के दशक में लगभग हर हीरो की मां के रोल में दिखाई देने वाली रीमा लागू की हर साल 18 मई को पुण्यतिथि रहती हैं।18 मई 2017  को उनका निधन हुआ था |

हिंदी सिनेमा में हमेशा से ही मजबूर और दुखी मांओं का चलन रहा था। ऐसे में रीमा लागू ने हिंदी फिल्मों में मां के स्वरुप की एक नई परिभाषा अपने अभिनय से गढ़ी |  

हिंदी फिल्मों में सफेद बालों वाली बूढ़ी मां की पारंपरिक छवि को तोड़ते हुए रीमा लागू ने यह साबित किया कि मां काले बालों वाली खूबसूरत औरत भी हो सकती हैं। बॉलीवुड में पीड़ित मातृसत्ता के किरदार से विपरीत रीमा लागू एक 'कूल मॉम' का उदाहरण बन कर उभरीं। उन्होंने कई फिल्मों में अपने किरदार से बॉलीवुड में अपनी छवि एक ऐसी मां के रूप में स्थापित की, जिसे हम प्यार करते हैं।जिसके साथ उसकी संताने बिलकुल सहज रह सकती हैं |

इन्हें हिन्दी और मराठी सिनेमा में सहायक और माँ के कई किरदार निभाने के कारण जाना जाता है। यह लगभग चार दशक से मराठी मंच पर कार्य कर रही थीं। इन्होंने मराठी धारावाहिक "तुजा मजा जामेना" में मुख्य किरदार निभाया था, इसके अलावा हिन्दी धारावाहिक "श्रीमान श्रीमती" और "तू तू मैं मैं" में भी महत्वपूर्ण किरदार निभा चुकी हैं।

इन्हें कई हिन्दी फिल्मों में माँ के किरदार निभाने के कारण जाना जाता है, जिनमें मैंने प्यार किया, आशिकी, साजन, हम आपके हैं कौन, रंगीला, वास्तव, कुछ- कुछ होता है, कल हो ना हो और हम साथ साथ हैं आदि है।नज़र डालते हैं उनकी कुछ प्रमुख फिल्मो पर |

एक-मैंने प्यार किया 

मां के रूप में रीमा लागू ने फिल्म मैंने प्यार किया से अपनी अलग पहचान बनाई। राजश्री की इस फिल्म में वे सलमान खान की मां की भूमिका में नजर आईं |रीमा लागू पहली बार एक ऐसी मां बनीं जो हिंदी सिनेमा की पारंपरिक मां की छवि से बिल्कुल विपरीत थी। काले बालों वाली इस खूबसूरत मां को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था।

दो-हम आपके हैं कौन 

राजश्री की ही अपने दौर की मशहूर फिल्मों में से एक हम आपके हैं कौन में रीमा लागू ने माधुरी दीक्षित और रेणुका शहाणे की मां की भूमिका निभाई थी।

इस फिल्म में वह एक बार फिर हिंदी सिनेमा की दुखियारी मां की छवि को तोड़ती नजर आई। फिल्म में वह बेहद खूबसूरत मां के किरदार में दिखाई दीं, जिसे दर्शकों की तरफ से काफी प्यार मिला। यह एक ऐसा किरदार था जहां रीमा लागू ने भारतीय मां को काफी कूल बना दिया था।

तीन -हम साथ-साथ हैं 

फिल्म हम साथ साथ हैं में रीमा आलोक नाथ के साथ नजर आई थीं। फिल्म में दोनों कलाकारों ने सलमान खान, सैफ अली खान, मोहनीश बहल और नीलम कोठारी के माता-पिता की भूमिका निभाई थी। इस भूमिका में रीमा आदर्श मां के किरदार में खूब जमी थीं। इस फिल्म में उनकी भूमिका में एक नकारात्मक भाग भी देखने को मिला, लेकिन बाद में उन्होंने अपने प्यार और ममता से इस किरदार में जान फूंक दी और भूमिका को नयी ऊंचाई दी । 

चार- वास्तव 

इस फिल्म में रीमा लागू की अब तक की सबसे कठिन भूमिका थी। उन्होंने इसमें संजय दत्त की मां की भूमिका निभाई थीं।

फिल्म में रीमा एक खूबसूरत मां के साथ-साथ इरादों का पक्की एक मजबूत महिला के किरदार में  नजर आईं थीं । फिल्म में वह गैंगस्टर बन चुके अपने ही बेटे को गोली मार देती है।

पांच - कल हो ना हो 

फिल्म कल हो ना हो में, रीमा लागू एक ऐसी मां की भूमिका में नजर आई थीं, जिसका बेटा एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। फिल्म में रीमा लागू ने शाहरुख खान की मां का किरदार निभाया था। फिल्म में वह एक साहसी और धर्यवान महिला  के रूप में नजर आईं।

छह - जिस देश में गंगा रहता है

उनकी यादगार भूमिकाओं में फिल्म जिस देश में गंगा रहता है को भी सम्मिलित करना चाहिए |इस फिल्म में वे अभिनेता गोविंदा की माँ बनी थी |फिल्म महाराष्ट्र के किसी गांव की पृष्ठभूमि पर थी |फिल्म में अभिनेता शक्ति कपूर अपने मिजाज से देहाती बेटे को रीमा लागू को सौंपकर शहर में बस जाते हैं |इस भूमिका को भी उन्होंने अपनी भूमिका को पूर्ण क्षमता से निभाया था |  

उनकी पांचवी पुण्य तिथि पर प्रगतिशील साहित्य पत्रिका की और से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि | 

 - कुणाल कुमार 'सेवक'