मेरे एक दोस्त हैं - मिस्टर खड़ूस
देते हैं धौंस और ,लेते हैं घूस
उनका गठबंधन है बहुत मजबूत
लेकिन आदत में हैं मक्खीचूस |
लेन और देन का उनका निराला ही प्रान्त है
दुःख देकर भी सुख लेना उनका मौलिक सिद्धांत है
एक दिन वे मंदिर गये,चढ़ावे में बड़े -बड़े नोट देखकर
वे फूले ना समाये
और नए-नए चेहरों के
नए-नए जूते -चप्पल देखकर ख़ुशी से इतराये
और दूसरी पादुका स्थान की तरफ
मैंने जोर से कहा-मंदिर में तो मैली नज़रों का रक्खो ध्यान
सावधान रहो श्रीमान
सामने खड़े देख रहे हैं कृष्ण भगवान
मिस्टर खड़ूस बोले-भगवान मंदिर से भागकर कहाँ जायेंगे
वे तो भक्तों के वश में हैं,कल भी यहीं मिल जायेंगे
लेकिन
आज वाले चेहरे कल नहीं आएंगे
और ये नए जूते -चप्पल कल नहीं मिल पाएंगे
बेशक यह भक्ति की रुस्वाई थी
लेकिन उनकी बात में सच्चाई थी -मैं हो गया मौन
आखिर गरीब का साथी है-कौन
खड़ूस ने कंघे से अपनी
भची-खुची जुल्फें सँवारी
और भजन गाने की कर ली तैयारी
वे -मधुर स्वर में बोले -
जिनकी सूरतें हैं अति प्यारी
उनकी पीर हरो कृष्ण मुरारी
वे मधुर स्वर में गा रहे थे
और रूपसियों को लुभा रहे थे
मैंने पूछा -मिस्टर खड़ूस -मंदिर में तो छोड़ दो झूठ से नाता
आखिर सामने मौजूद है-सबका विधाता |
वे बोले झूठ से हमारा गहरा नाता है
आखिर झूठ ही हमारा पिता
और झूठ ही हमारी माता है
खोखली जय जयकार करने में
हमारा क्या जाता है |
क्या सुन नहीं रहे हो यह भजन
झूठ में आजकल बहुत है वजन
जिसके पास झूठ है
उसे सब पाप करने की छूट है
और
Do,nt worry & be happy -रामनाम की लूट है
जानते हो,घर-बार,यह संसार सब झूठ है
इसलिए सीखो कुछ व्यवहारिकता -झूठ में ही तो छिपी सच्ची कमाई है
हम तो सच्चे दरबार में भी झूठ के अनुयाई है
नारा बेशक सत्य का लगाते हैं
लेकिन दिल से झूठ को ओढ़ते हैं और झूठ ही बिछाते हैं
रिश्ते में बेशक हम आपके दोस्त हैं,मुंहबोले भाई हैं
लेकिन झूठ को हम कभी नहीं भूलते ,झूठ के तो हम सच्चे अनुयाई है |
गीता में प्रभु के वचन मन को लुभाते हैं -
और हम उन्हें चाव से गाते हैं
हे अर्जुन ,संसार मिथ्या है,मोह-माया व्यर्थ है
लेकिन देखा है हमने -माया से ही जीवन में अर्थ है |
चन्दा खाकर ही तो नेता महान कहलाता है
गांव की गलियों से सीधे
मंत्रिमंडल में जाता है
वो गाना याद करो-
ना बीवी ना बच्चा ,ना बाप बड़ा ना भैयाकलियुग में बस सार यही है-सबसे बड़ा रुपैया
इस रुपैये का ही दिल से ध्यान करो
और सात पीढ़ियों के कल्याण का इंतजाम करो
लेकिन भाई
यह तो मैं होली की नशे में कह गया
सच्ची बात तो यह है कि
यह सब केवल हंसी -ठिठोली है
दोस्त - बुरा न मानो होली है |
-औघड़नाथ