हास्य व्यंग्य : हिजाब - परदे में कोई बैठा है पर्दा करके

लेख तो मैं गंभीर लिखने बैठा था लेकिन बीच में होली आ गयी और होली में तो बाबा भी देवर हो सकता है क्यूंकि ब्रज की गोपिका कहती है-

फागुन में बाबा भी देवर लागे... 

स्पष्ट है कि हम भारतीय शुरू से ही रसिक प्रवृत्ति के रहे हैं |

उस दिन मैं ऑफिस से निकल रहा था कि, देखा - सामने से  स्कूटी पर दो युवतियां जा रही हैं |देखने से लगता था कि दोनों ही मुस्लिम नहीं थी |

दोनों की आँखें और नाक तक का भाग एक सुन्दर कपडे से ढंका हुआ था |पिछले डेढ़  महीने से सुन रहा हूँ कि इस खूबसूरत कपड़े को  ,जिसने खूबसूरत चेहरे को आगोश में ले रखा है ,को हिजाब कहते हैं |  

दोनों की उँगलियों से लगता था कि खूबसूरत रही होंगी लेकिन चेहरा लगभग ढंका हुआ था इसलिए हिजाब के पीछे की कल्पना करके अपने रास्ते चला गया |मुझे हिंदी फिल्म निकाह की कव्वाली के बोल याद आये,जिन्हें असरानी पर फिल्माया गया था कि-

चेहरा छिपा लिया है,किसी ने हिजाब में,

जी चाहता है कि,आग लगा दूँ नक़ाब में |

अब असरानी से कोई पूछे कि -भाई साहब,आप नक़ाब में आग लगाने की इच्छा क्यों रखते हैं जबकि  हिजाब पहनने से संविधान की एक भी धारा का उल्लंघन नहीं हुआ है |

काश ,कर्नाटक की सरकार से भी कोई यह सवाल पूछता कि हिजाब से उसे क्या समस्या है जबकि इतने वर्षों से इसका इस्तेमाल होता आ रहा है |  

मैंने खुद से ही पूछा कि मैं क्यों उन युवतियों के परदे को नापसंद कर रहा था ,जवाब मिला कि अपने उस समय उत्पन्न रोमांटिक मूड के कारण |

सवाल उठता है कि कर्नाटक के कॉलेजों का मूड भी क्या रोमांटिक हो गया है,जो हिजाब पहनने के खिलाफ हैं अन्यथा बाबा आंबेडकर वर्षों पहले भारतीय संविधान में लिख गए हैं कि हिजाब पहनना या ना पहनना युवतियों का मौलिक अधिकार है |

जो धर्म के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं वे हिजाब पहन लेंगी और जो उदारवादी हैं वे नहीं पहनेंगी |लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में हिजाब पर अटैक करने की ज़रुरत नहीं थी | 

आज के अख़बार में देश के रखवालों के जो प्रवचन  छपे हैं.उन्हें पढ़कर तो ऐसा लगता है कि यह कोई बड़ी समस्या है |हिजाब पहनने -ना पहनने के इस मुद्दे ने एक बड़ी समस्या का रूप ले लिया है |महायोगी तक गरजने में लगे हैं |फिर भी मैं उनके शब्दों को प्रवचन कह रहा हूँ क्यूंकि आज के  योगी सामान्य योगी नहीं हैं बुलडोजर तक सहजता से चला लेते हैं ,इसलिए उनके भाषणों पर  प्रवचन से कम विशेषण लगाना उनकी अवमानना हो सकता है  |

मैं तो आम इंसान हूँ और आम इंसान तो अपनी निजी पत्नी तक की अवमानना करने की मिमाक़त नहीं कर सकता अन्यथा चाय का कप भी उसकी पहुँच से दूर हो सकता है |बहरहाल बात हिजाब की हो रही थी |

बुद्धिमान दोस्तों ने पहले ही बताया था कि दस मार्च के बाद यह समस्या ही नहीं रहेगी इसलिए निश्चिन्त रहो |

आम आदमी को न तो आम आदमी पार्टी की चिंता होती है ,न ही कांग्रेस की ,जो धीरे -धीरे वतन पर शहीद होती जा रही है |

उसे तो अपने दाने पानी की चिंता होती है कि समय पर मिलेगा या नहीं ? बहरहाल हिजाब दिखने में तो ठीक -ठाक ही होता है |बुद्धिमान दोस्त कहते हैं कॉलेज में तो अनुशासन रहना ही चाहिए |बुद्धिमान दोस्तों की बात बिलकुल ठीक है क्यूंकि पिछले ज़माने के बुद्धिमान भी यही कहते थे ,वाहनों तक पर लिखा होता था- अनुशासन ही देश को महान बनता है |

इसलिए बुद्धिमानो की बात बिलकुल ठीक है कॉलेजों में तो अनुशासन होना ही चाहिए |इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते ही बाबा तुलसीदास भी याद आ गए ,जिन्होंने लिखा है कि वो सेवक मुझे परमप्रिय है जो मेरा अनुशासन मानता है |इस प्रकार अनुशासन तो रहना ही चाहिए लेकिन सिर्फ अनुशासन ही तो काफी नहीं हालांकि कॉलेज में तो पढाई भी होनी चाहिए |इन दिनों तो वहां रोमांस भी होता है और राजनीति भी |

अब तो माननीय न्यायालय ने भी न्याय कर दिया है इसलिए मैं भी अपनी जुबान को लगाम और वाणी को विराम देता हूँ ,खुदा हाफिज |

- आर.के.प्रिय