नारी प्रताड़ना की ज्वलंत समस्या पैदा कहाँ से हुई?

 रामकुमार सेवक 

स्त्री व् पुरुष एक दूसरे के बराबर नहीं हैं,यह एक बहुत पुरानी धारणा थी जिससे बहुत समय तक चन्दन के पेड़ पर लिपटे विषधर की भाँति हम चिपटे रहे लेकिन वर्षों पहले ही हमें समझ आ गया कि जिस प्रकार हमारे दायीं और बायीं आँख एक समान है इसी प्रकार स्त्री और पुरुष भी एकसमान हैं लेकिन प्रकृतिजन्य भेद तो हैं ही,उन भेदों को मैं छोटा और बड़ा न मानते हुए एक प्रकार की विशेषता मानता हूँ |

स्त्री की अपनी विशेषता है और पुरुष की अपनी |उन विशेषताओं ने ही इस सृष्टि को इतना सुन्दर रूप दिया है कि कोई इंसान इस दुनिया को छोड़ना नहीं चाहता |लाख प्रकार के दुखों के बावजूद कोई इंसान मरना नहीं चाहता |कहने का भाव कि यह सृष्टि इतनी सुन्दर है कि कोई इससे दूर नहीं जाना चाहता |इसमें सबसे सुन्दर है इंसान जिसे परमात्मा ने पूरी प्रकृति में सर्वश्रेष्ठ बनाया  लेकिन इंसान ने अपनी ही साथी स्त्री को अपने से तुच्छ समझा और उसके साथ दूसरे दर्ज़े का व्यवहार शुरू कर दिया |दिखावे के लिए तो उसने नारी की पूजा की लेकिन मन से वह उसे जीव मानने की बजाय एक वस्तु ही मानता आ रहा है |वो गाना अनायास ही याद आ गया,जिसमें गीतकार लिखता है-

तू चीज बड़ी है मस्त मस्त ---और लोगों ने उसका समर्थन किया ,गाने को हिट बनाया |

 

सोचने की बात यह है कि  इंसान के नारी को एक वस्तु मानने वाले विचार को जड़ से कैसे ख़त्म किया जाए ?

एक पिता को बेटी बहुत अच्छी लगती है |एक भाई को बहन |एक पति को उसकी पत्नी और एक प्रेमी को प्रेमिका | बेटी,बहन,पत्नी और प्रेमिका एक स्त्री ही तो है |हम बहुत सारे इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों का उपयोग करते हैं |इन यंत्रों को हम वस्तु मानते हैं जो कि हमें आराम पहुंचाती हैं |इन वस्तुओं का हम उपयोग करते हैं और अनुपयोगी होने पर उन्हें बेच और फेंक भी देते हैं क्यूंकि इन वस्तुओं में से कोई भी इन वजहों के कारण अपना विरोध दर्ज़ नहीं करती लेकिन औरत एक जीव हैं |उसमें कुछ भी पुरुष से कम नहीं है |यदि कुछ भी हमें उनमें कमी दिखाई देती है तो पुरुषों के भीतर कुछ और कमी है जिसे कोई स्त्री ज्यादा अच्छी तरह बता सकती है |

जब दोनों में ही कुछ खूबियां और कुछ खामियां हैं तो दोनों ही एकसमान हुए |इस अवस्था में यदि स्त्री को कोई वस्तु समझता है तो वह गलती कर रहा है |वह वस्तु नहीं है क्यूंकि कोई यदि उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई उसका उपयोग करता है तो उसमें विरोध करने की क्षमता है |वह क्षमता कम या ज्यादा तो हो सकती है लेकिन क्षमता से किसी का इंकार कर पाना संभव नहीं है |स्पष्ट है कि वह वस्तु नहीं है जिसका उपयोग करके उसे फ़ेंक दिया जा सके |

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि किसी स्त्री का अपहरण कर लिया गया |हथियारों के बल पर उसे कुछ समय के लिए तो जैसे गुलाम ही बना लिया और उसके साथ जो जी में आया किया और फिर कहीं वीरान में या गांव से बाहर फेंककर चले गए |लड़की के साथ सड़क पर ही हाथापाई की और भाग गए |या किसी के साथ विवाह किया और इस पवित्र सामाजिक स्वीकृति का दुरूपयोग करके उसे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों में बाँट दिया |

यदि उसका मायका समर्थ नहीं है तो उसे देह का व्यापार करने के लिए असामाजिक तत्वों को बेच दिया |उसे पशु-पक्षी की भाँति क्रय -विक्रय योग्य मान लिया |कहने का भाव कि ये सब और इससे मिलते-जुलते प्रसंग इंसान को इंसानियत से नीचे गिराते हैं |उस हालत में इंसान सिर्फ अपराधी ही होता है इसके अलावा और कुछ नहीं |

गांव शहर और कस्बों-गांवों में स्त्री आज ख़ौफ़ज़दा है और खुलकर जी नहीं पा रही है और सरकार सिर्फ कानून बनाकर रह जाती है जिनका पालन नहीं होता |                      

रविवार 06-05-2018 को सत्संग से लौटकर ध्यान आया  कि सत्संग स्थल कितने शांत और आनंददायक होते हैं ,दुनिया में रहकर भी दुनिया से कितने अलग होते हैं |दुनिया में यदि कहीं भी इतनी हाज़री जुटे तो कितने ही अनर्थ हो जाते हैं |परिवार तो प्रायः भीड़ आदि से दूर ही रहते हैं |इसके विपरीत सत्संग में हम सब अपने परिवार के साथ ही जाते हैं और इसलिए जाते हैं कि हम एक बड़े परिवार में ही जा रहे हैं |

दिल-ओ -दिमाग में यह भाव ही हावी रहने के कारण हम सबकी प्रायः ऐसी अवस्था होती है कि हमने ऐसी चीजें सुननी और समझनी हैं जो भक्ति में आगे बढ़ाने वाली हों |विचारों को बेहतर बनाने वाली हों |इस अवस्था के कारण एक मर्यादित वातावरण सर्वत्र नज़र आता है |यह इस सच्चाई के बावजूद है कि सत्संग में भी अब वह ऊँचाई नहीं रह गयी है जो कुछ वर्ष पूर्व तक थी |नारी अब उतनी सुरक्षित नहीं है लेकिन उतनी असुरक्षित भी नहीं है जितनी सडकों पर भीड़ में दिखती है |इसका अर्थ है कि सत्संग अब भी बेहतर हैं |भक्तिपूर्ण और प्रगतिशील वातावरण की खुशबू को फ़ैलाने की आवश्यकता है |

जिस दिन नर के भीतर शांतिपूर्ण सह अस्तित्व का भाव स्थापित हो जायेगा,नारी सुरक्षित हो जाएगी |नारी प्रताड़ना का भी अन्त हो जायेगा |