आदमी से डरे आदमी है
मेरे मौला ये क्या बेबसी है
चंद सांसों का है खेल सारा
क्या करे बस यही जिंदगी है
रो रहे है उन्हें तुम हंसाओ
बस खुदा की यही बंदगी है
पास लाखो करोड़ों है माया
ख़तम होती नहीं तिषनगी है
दिल मुहब्बत भरा तोड़ देना
ये तो आदत तुम्हारी बुरी है
ये खुदा चांद समझो अगर तुम
सबके घट में बसी चांदनी है
राज कोई नहीं जान पाया
कौन सी सांस अब आखिरी है
यार अपने हुए सब पराये
देख "सागर" ये क्या दोस्ती है

- गोपी चाँद डोगरा 'सागर'

- गोपी चाँद डोगरा 'सागर'
