मानव अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में 12 दिसंबर 2020 (शनिवार) को आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन पर पढ़ी गयी कवितायेँ (एक)

 मानव अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में 12 दिसंबर 2020 

( शनिवार ) को आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में 

जियो और जीने दें समझें - कर्तव्य भी अधिकार भी 

शीर्षक पर पढ़ी गयी कवितायेँ ( एक ) 

 

- देवेंद्र कुमार (फरीदाबाद)







जियो और जीने दो, हमको महावीर ने सिखलाया,

अपने - अपने हित को देखा,हमनें भाव समझ ना पाया

हिन्दू - मुस्लिम-सिख-ईसाई,हैं एक सभी यह मार्ग बताया

लेकिन अपने स्वारथ खातिर,इस नारे को सदा भुलाया 

भेद समझ पाएं नारे का,दें प्यार भी सत्कार भी

जियो और जीने दो,समझें कर्तव्य भी अधिकार भी


अपने हित के खातिर,हर पल मन मेरा बेचैन रहे

लोभ का कीड़ा मौन ना बैठे ,यह ही निशदिन सोच रहे

और अधिक पाने की खातिर ,भूखे-प्यासे दौड़ रहे

जो तेरा है,हो जाये मेरा,हम हर मर्यादा तोड़ रहे

मिल कर नारे के भाव को समझें,और करें सत्कार भी

जियो  और जीने दो,समझें कर्तव्य भी अधिकार भी


कर्तव्यों को ताख में रख के,अधिकारों के नारे हैं

कुछ ना करना देश कि खातिर ,हम तो बस बेचारे हैं

जो अधिकार मिले है हमको ,हमें चाहिए सारे हैं

सत्ता की कुर्सी मिल जाये,ना कुछ कर्तव्य हमारे हैं

हर दांव लगा देंगे कुर्सी पर ,तेरा-मेरा परिवार भी

जियो और....


कर्तव्य और अधिकार तो, इक सिक्के के दो पहलू भाई |

कर्तव्यों को भूल गए सब, अधिकारों की करें दुहाई |

सब अपना कर्तव्य करें तो, अधिकार स्वतः मिल जायेंगे |

पीछे - पीछे चलने वाले, भी सब आगे जायेंगे |   

मानव का गहना मानवता, है यही शृंगार भी

जियो और जीने दें समझें - कर्तव्य भी अधिकार भी