सत्यमेव जयते शीर्षक पर 24/10/2020 को आयोजित प्रगतिशील पाठक मंच के कवि सम्मेलन में पढ़ी गयी रचनाएँ (दो)

 

1

 

दूसरों की ख़ुशी के लिए ग़म भुलाना तो पड़ता है,

दर्द कैसा भी हो  सहकर मुस्कुराना तो पड़ता है 

 

प्यार की थाली में  परोसते हैं लोग कड़वी बातें,

स्वाद कैसा भी लगे  उसे खाना  तो  पड़ता है 

 

बुलंदियां बे-शक मिले तो  निभाने का हुनर मांगे,

चकाचौंध रौशनी में खुद को बचाना तो पड़ता है 

 

ख़ुदा ने दी है काफ़िले की जिम्मेदारी सभी को,

राह में कोई  भी गिरे  उसे उठाना तो पड़ता है 

 

होगा तो वही  जैसा भी परवरदिगार  चाहता है,

पर कर्म भूमि में हौसला आज़माना तो पड़ता है 

 


 

2

 

आँखें बंद करके  अंधेरे से  क्यूँ डर रहे हैं लोग

उजाला फैला है बाहर  ऐसा क्यूँ कर रहे हैं लोग

 

मर्ज़ जान लेवा नहीं उसपर इल्ज़ाम ना डालिए

ग़लत  दवाएं खाकर  जाने क्यूँ मर रहे हैं लोग

 

बुलबुले की  मानिंद है सांसों का  चलना हुज़ूर

फिर ऐतबार बुलबुले का जाने क्यूँ कर रहे हैं लोग

 

झूठी ताबीर दिखाता आइना रंग जवानी सूरत की

उसी आइने के  आगे फिर  क्यूँ सँवर रहे  हैं लोग

 

इबादत के लिए जब  कुर्सियों की जरूरत नहीं

फिर कुर्सियों के लिए इबादत क्यूँ कर रहे हैं लोग

 

- अविनाश जैसवार (मुंबई)