अंतिम मुकाम तक
देखे थे ख्वाब- कदम से कदम मिलाकर चलेंगे
अंतिम मुकाम तक|
कुछ -वक्त ही दगा दे गया
रूक गये कदम तुम्हारे ,बीच सफर में
कैसे चलूँ मैं अब बिन तेरे
इस कांटों भरी डगर पर
अंतिम मुकाम तक...
काश, बढ़ते जवानी से बुढापे तक कदम
एक साथ
कभी मेरे दांत टूटते कभी तुम्हारे
एक साथ नया डेनचर लगवाते
कभी तुम मेरा ढूंढ के देते
कभी मैं तुम्हारा ढूंढ के देती
अंतिम मुकाम तक...
लड़खड़ाते कदमों से चलते साथ- साथ
जिंदगी के गीत गुनगुनाते हुये
सुर में सुर मिलाते हुये
झुर्रियों वाले हाथ थाम कर,
इक दूजे की लाठी बनते,
अंतिम मुकाम तक...
कुछ और गृहस्थी निभा लेते
सुख- दुख ही बाँट लेते
रिटायर्ड जिंदगी क्या होती है
दादा -दादी, नाना- नानी
बनने का सुख क्या होता है
ये भी जान लेते,
कुछ मजा हम भी ले लेते
अंतिम मुकाम तक...
जवानी में खूब निहारा इक- दूजे को
प्यार भरी मस्त निगाहों से
काश, झुर्रियों वाला चेहरा भी निहार लेते
बूढी आखों से
अंतिम मुकाम तक...
कभी बरसात की शाम को,
भीगते हुये किसी पार्क में बैठकर ,
चाय की चुस्कियों के साथ
जवानी की मस्तियाँ याद करते,
अंतिम मुकाम तक...
मेरी भी तमन्ना पूरी हो जाती
हर सुहागन की तरह,
जब श्र॔गार किये लाल जोड़े में
तुम्हारे ही कांधे जाती
अंतिम मुकाम तक...
दो
: कहते हैं कर्म की गति बड़ी बलवान होती है ,
ब्रंहांड से टकराकर वापिस होती है |
ये एक प्रकार की प्रतिध्वनि है
जो वापसी में देने वाले के पास ही होती है |
यह जगत मायाजाल है,
माया आपको अपनी ओर खींचती है |
संत तो बचा लेगा खुद को पर
संसारी के लिये बचना सुलभ नहीं ,
क्योंकि संसारी के लिए
धन आवश्यक भी तो है
भौतिक जरूरतें भी तो हैं
धन के बिना कैसे पूरी होंगी?
अब सवाल उठता है धन- उपार्जन का-
इसके कई साधन हैं -व्यापार नौकरी वगैरह |
उचित साधन से कमाया गया धन फलित होता है |
अनुचित साधन से अर्जित धन फलित नहीं होता |
आजकल लघु रास्ते से धन अर्जित करने के
बहुत साधन है |
एक बहुचर्चित साधन है-
दूसरों के धन पर अपना अधिकार जमाना |
पैसा उधार लेना या भारी -भरकम ब्याज का
लालच देकर पैसा लेना और ना लौटाना,
या कमेटियां डालकर लाखों रुपये जमा कर के
रातों रात भाग जाना
या फिर
पैसे ना लौटाने के लिए
खुद को दिवालिया घोषित कर देना,
चाहे कितनी ही सम्पति का
मालिक क्यों न हो |
आजकल आपको इंटरनैट पर भी
कई रास्ते दिखाये जाते है,
कई फोन भी आते होंगे
साइबर के जरिए भी
यह काम होता है |
डाकू डाका डालते हैं
चोर चोरी करता है
कुछ का तो व्यवसाय
ही यही होता है |
धन तो अर्जित कर लिया
पर उसका उपयोग कैसे हो ?
तुम लाख सम्भालो पर अनुचित
साधन का धन आप के पास टिक
ही नहीं पायेगा |
कुछ ऐसे रास्ते से निकल जायेगा
जो कभी आपने सोचा भी न होगा
कुछ लोग भगवान को रिश्वत देकर
आत्मतुष्टि तो कर लेते है,लेकिन
क्या इस कर्म से जीवन मुक्ति पा लेते है ?
नहीं, कहीं न कहीं तो इसकी
कीमत चुकानी ही पड़ती है
खासकर उस धन की
जो-किसी मजबूर का हो |
किसी गरीब का,
किसी लाचार का हो
अंत में
कुछ का काम ही आहें कमाना होता है |
कमजोरों पर जुल्म ही ढाना होता है |
डूबो देगी इक दिन ये दौलत ऐ बशर .
इस से तो खुद को बचाना होता है |