भारत ऋणी शहीदों का,
खून की अंतिम बूंदों का
छाती से मुँह ओट दिया
दुश्मन की बंदूकों का।
भारत ऋणी शहीदों का।।
हवा धरती के संग हर दिल पे
नाम उन्ही का लिखा है।
राष्ट्र ध्वज को जब भी देखूँ
चेहरा उन्हीं का दिखा है।
उम्मीद जगाये शहादत उनकी
देश बने उम्मीदों का
भारत ऋणी शहीदों का।।
देश की खातिर निज सपनों का
जीते-जी न ध्यान किया
भूखे-प्यासे रह के जीवन
भारत पे कुर्बान किया।
देश है तो सब सपनें हैं।
विश्वास था सुख की नींदों का
जाँ देकर भी वे आजाद
भारत देख न पाँए
रचे-बसे माटी में क्यों न
इसका तिलक लगाएँ
गवाह रहा है भारत इनके
बलिदानी गीतों का
भारत ऋणी शहीदों का।
हम चाहे कितना बढ़ जाएंँ
कितनी आजादी मनाएँ
मिली आजादी उन्ही के कारण
ये भूल कभी न पाँए
नेता सुभाष भगत सिंह बिस्मिल
नाम अमर हिन्दों का।
भारत ऋणी शहीदों का।
वीर पराक्रमी भारती सेना
मुँह दुश्मन का तोड़ रही
धरती जल आकाश में रह के
हर बाधा को मोड़ रही।
नाज हमें सेना पे इनमें
लहू वीर बूंदों का
भारत ऋणी शहीदों का।
जाति-धर्म क्षेत्रों से बढ़ के
प्रथम भारत देश है
एक है भारत बगिया लेकिन
भिन्न पुष्पों का वेश है।
सकल कर्म हों इसकी खातिर
ये सर्वोपरि हितों का
भारत ऋणी शहीदों का।