भारतमाता के सपूत देशभक्त शिरोमणि शहीद ऊधम सिंह


  देशभक्ति और देशद्रोह ,दोनों शब्द एक-दूसरे के विपरीत हैं लेकिन लोग दोनों ही शब्दों का प्रयोग करते हैं |सत्ता जिसे देशभक्त मानती हैं ,प्रतिपक्ष प्रायः उसे देशद्रोही मानता है |हज़ारों अमर शहीद,हम जिनकी देशभक्ति पर नाज़ करते हैं,ब्रिटिश शासन उन्हें देशद्रोही मानता था और ज्यादातर मामलों में अपराधी मानकर उन्हें फांसी पर चढ़ा देता था |


  शहीद ऊधम सिंह हमारे ऐसे ही महानायक थे जिन्हें हम देशभक्तों में शिरोमणि मानते हैं |


  उन्हें देशभक्तों में भी शिरोमणि मानने के कुछ नैतिक कारण हैं |पहला कारण तो यह है कि उनकी संकल्पशक्ति बहुत मजबूत थी |वे मात्र बीस वर्ष के थे जब जलियांवाला बाग़ में निरपराध लोगों को गोलियों से भून दिया गया |इस भीड़ में बूढ़े ,औरतें और बच्चे भी थे |विदेशी शासकों को निहत्थे लोगों पर जरा भी तरस नहीं आया और वे तब तक गोलियां चलवाते रहे,जब तक चलवा सकते थे | ऊधम सिंह गरीब और अनाथ थे इसके बावजूद उन्हें निहत्थे लोगों की हत्या सहन नहीं हुई और उन्होंने जनरल डायर को मृत्युदंड देने का संकल्प किया |और बाइस वर्षों के लम्बे समय तक वे निराश नहीं हुए और मशाल की तरह अपने दृढ - संकल्प को जीवित रखा और अंततः अपना संकल्प पूरा किया |


  दूसरा कारण यह है कि वे मज़हबी नहीं मानवतावादी थे |वे लोगों को हिन्दू-मुसलमान आदि मज़हबों में बांटकर नहीं देखते थे |उन्होंने अपना नाम रखा-राम मोहम्मद सिंह आज़ाद |यह सोच उन्हें विशाल विचारधारा का स्वामी बनाती थी |इस विचारधारा की आज भी देश को बहुत ज़रुरत है |शांति की हमेशा ज़रुरत रहती है |स्थाई शांति के लिए आपसी भाईचारा और बड़ा दिल चाहिए| शहीद ऊधम सिंह इस दृष्टि से भी शिरोमणि प्रेरणापुरुष नज़र आते हैं |


  तीसरा और अंतिम उनका गुण ,जो उन्हें शिरोमणि देशभक्त सिद्ध करता है,वह है-नारी सम्मान |जब वे अपना लक्ष्य पूरा करके हॉल से बाहर निकल रहे थे तो वहां की स्थानीय एक औरत ने उनका रास्ता रोक दिया | देशभक्त ऊधम सिंह यदि चाहते तो उसे धक्का देकर वहां से भाग सकते थे लेकिन उन्होंने भारतीय संस्कृति का मान रखा और अपनी जान जोखिम में डाल ली |शहीद ऊधम सिंह के ज़ज़्बे को अपने कर्म से ज़िंदा रखने की ज़रुरत है |गुंडे-बदमाश तो शुरू से ही नारी पर जुल्म करते आ रहे हैं लेकिन इस समय तो सफेदपोश लोग,जो महान देशभक्त कहलाते हैं |सन्त- महापुरुष और धर्मगुरु की उच्च पदवी पर आसीन लोग भी भारत माँ की बेटियों को कलंकित करने में लगे हुए हैं तो शहीद ऊधम सिंह की इस प्रेरक मिसाल के सामने मेरा सिर श्रद्धा से झुक जाता है | आज 26 दिसम्बर 2019 को यदि वे जीवित होते तो 120 साल के होते |उनके एक सौ बीसवें जन्म वे जन्मदिवस पर उन्हें शत-शत नमन |


जय हिन्द