सर्पपाश से मुक्त होने की क्षमता भी राम ही देता है
-  रामकुमार 'सेवक'  गरुड़ के मन में भ्रम आ गया कि ये कैसे भगवान के अवतार हैं जिन्हें मुक्त करने के लिए मेरी सेवाओं की ज़रुरत पडी है |अगर ये नारायण भगवान विष्णु के अवतार रहे होते तो उन्हें गरुड़ की सेवाओं की आवश्यकता न पड़ती | गरुड़ अभी यह सब सोच ही रहा था कि रोम-रोम में बसने वाले राम का ध्यान आ …
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बाबा अवतार सिंह जी ने कहा कि सुनने का बीज डालिये तो बाकी भी आपकी बात ध्यान से सुनेंगे
- रामकुमार 'सेवक'      अक्सर मेरे जैसे लोगों की यह कमजोरी होती है कि अगर कोई थोड़ी सी भी प्रशंसा कर दे तो आपै से बाहर हो जाते हैं,और थोड़ी सी भी आलोचना अगर कोई कर दे तो क्रोधित हो जाते हैं |यह क्रोध कभी कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न कर देता है कि झगडे -फसाद की नौबत आ जाती है इसलिए सन्तों ने सहज रहने…
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बाबा हरदेव सिंह जी के जीवन में दिखी दूसरों की भावनाओं की क़द्र अर्थात संवेदनशीलता की पराकाष्ठा
सत्गुरु सतगुरु की आँखें तो शेष लोगों के समान ही होती हैं लेकिन दृष्टि विलक्षण होती है |यह निष्कर्ष मुझे एक प्रसंग से मिला जो आदरणीय मित्र विवेक शौक़ जी के माध्यम से मुझे सुनने को मिला |           सत्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी मितभाषी थे लेकिन मंच पर आसीन होकर जब शिष्यों पर कृपा दृष्टि डालते थ…
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आपने जो शाल मुझे दिया है वह क्या तन.मन,धन के समर्पण से बाहर है ?
सर्दी के दिनों मैं जो शाल मुलखराज जी ओढ़ते थे वह मैंने ही उनके चरणों में समर्पित किया है,यह कहते समय उस नौजवान की मुद्रा समर्पण की तो बिलकुल ही नहीं होती थी | मुलखराज जी ने दुनिया भी देखी थी और भक्ति भी |         वे बाबा हरदेव सिंह जी के युग में जी रहे थे |बाबा जी ज्ञान को अच्छी तरह समझते थ…
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बाबा हरदेव सिंह जी के युग में बाबा बूटा सिंह जी के युग का आनंद
- रामकुमार सेवक  स्वामी विवेकानंद जब परमात्मा की खोज कर रहे थे तब उनका नाम था-नरेंद्र | कालांतर में किसी दोस्त ने प्रेरित किया तो वे महात्मा रामकृष्ण परमहंस की खोज में तत्पर हुए | रामकृष्ण जिज्ञासुओं की खोज उसी तरह करते थे जैसे बाबा बूटा सिंह जी श्रद्धालुओं ,जिज्ञासुओं की खोज किया करते थे | महात्मा…
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